पुस्तक लोकार्पण, पुस्तक के रूप में शब्द अमर हो जाते हैं : भंवर साहब,

बीरबलभूमि समाचार सीधी। चिन्मय मिशन सीधी के तत्वावधान में डॉ. लहरी सिंह की औपन्यासित कृति ‘केसरी नंदन आंजनेय’ एवं डॉ. शास्त्री प्रसाद मिश्र की पुस्तक ‘राष्ट्र चेतना के संवाहक मैथिली शरण गुप्त एवं माखनलाल चतुर्वेदी’ का लोकार्पण मधुसूदन पैलेस गांधी चौक सीधी के सभागार में पूर्व विधायक कृष्ण कुमार सिंह ‘भंवर साहब’ के मुख्य आतिथ्य, प्रदेश कार्य समिति भाजपा इन्द्र शरण सिंह चौहान के विशिष्ट आतिथ्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र मोहन गुप्त की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती जी की प्रतिमा के समक्ष पूजन-अर्चन, धूप- प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। अतिथियों को पुष्प माल अर्पित करने के पश्चात चिन्मय मिशन के जिला सचिव मुकुट धारी सिंह चौहान द्वारा समस्त अभ्यगतों का स्वागत अपने भाव उद्गारों के साथ किया गया। डॉ. सनत कुमार तिवारी प्राचार्य उच्च शिक्षा द्वारा डॉ. लहरी सिंह का शाल, श्रीफल एवं उपहार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. लहरी सिंह ने अपनी कृति ‘केसरी नंदन आंजनेय’ का परिचय देते हुए अंजना की तपश्चर्या, केसरी नंदन हनुमान के व्यापक चरित्र का संक्षेप में विवरण प्रस्तुत किया। लेखक डॉ. शास्त्री प्रसाद मिश्र ने मैथिली शरण गुप्त एवं माखनलाल चतुर्वेदी की राष्ट्रीय चेतना को ब्रिटिश सत्ता से लेकर आज तक के राष्ट्रीय परिवेश के लिए आवश्यक निरूपित किया। विद्वान समीक्षक, पूर्व प्राचार्य उच्च शिक्षा डॉ. रामलला शर्मा जी ने केसरी नंदन आंजनेय के कथा गुम्फन, चरित्र निरूपण एवं भाषा शैली पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा डॉ.शास्त्री प्रसाद मिश्र की कृति में निहित राष्ट्रीय चेतना को आज की आवश्यकता सिद्ध किया। द्वितीय विद्वान समीक्षक प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार सिंह जी ने ‘केसरी नंदन आंजनेय’ को नारी चरित्र प्रधान निरूपित करते हुए कथानक एवं पात्र चरित्र चित्रण में प्रतीक संकेत एवं कथ्य को नवीन ढंग से रचने की आवश्यकता पर बल दिया एवं डॉ. शास्त्री प्रसाद मिश्र की राष्ट्रीय चेतना परक कृति को यूगीन संदर्भ में उपयोगी सिद्ध किया। विशिष्ट अतिथि इंद्र शरण सिंह चौहान ने पौराणिक उपन्यास के प्रमुख पात्र आंजनेय तथा माता अंजनी के चरित्र वृत्त को प्रस्तुत किया एवं इन चरित्रों को नए संदर्भ में देखने पर बल दिया। मुख्य अतिथि कृष्ण कुमार सिंह ‘भंवर साहब’ ने अपने उद्बोधन में कहा कि शब्द पुस्तक में अमर हो जाता है। आज के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में भी पुस्तकों का महत्व यथावत बना हुआ है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में चंद्र मोहन गुप्त ने दोनों विमोचित कृतियों की उपादेयता पर प्रकाश डालते हुए डॉ. लहरी सिंह की औपन्यासिक कृति ‘केसरी नंदन आंजनेय’ पर कहा की डॉ. सिंह राम कथा को अपने सृजन में सर्वाधिक महत्व देते हैं। डॉ. शास्त्री प्रसाद मिश्र की पुस्तक मैथिली शरण गुप्त एवं माखनलाल चतुर्वेदी के काव्य में निहित राष्ट्रीय चेतना को देश काल एवं परिवेश के लिए उपयोगी बताया। कार्यक्रम के अंत में चिन्मय मिशन सीधी के उपाध्यक्ष उमापति सिंह गहरवार ने समस्त आमंत्रित अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन प्राचार्य डॉ. अरुण सिंह चौहान ने किया। इस आयोजन में नगर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों एवं विदुषियों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। सभी को विमोचित कृतियों की एक-एक प्रति अर्पित की गई। उपस्थित प्रमुख व्यक्तियों में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व साडाध्यक्ष लालमणि सिंह चौहान, पूर्व जिला पंचायत सदस्य संतोष सिंह चौहान, डॉ. रावेन्द्र बहादुर सिंह, डॉ. देवराज मिश्र, डॉ. शिव शंकर मिश्र ‘सरस’, डॉ. बी के सिंह, सूर्य पाल सिंह राजन, देवी चरण शर्मा, जगत प्रताप सिंह बाबा, जगत बहादुर सिंह चौहान, जगत प्रताप सिंह चौहान जोगीपुर, विश्वनाथ सिंह चौहान, रमाविलास सिंह चौहान, श्रीमती मीना गुप्ता, श्रीमती ऋचा सिंह, श्रीमती अनुराधा सिंह, श्रीमती सरिता सिंह डॉ. श्रीमती मनीला सिंह, संतोष सिंह गहरवार, अजय सिंह चौहान, रविशंकर पांडे, देवेश सिंह रिंकू, सुरेश कुशवाहा सहित स्वनाम धन्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे।
