आर्थिक और सैन्य रूप से चीन के सुपर पावर बनने के साथ उसके पड़ोस में हलचल तेज हो गई है. चीन के इस उभार से दुनिया के तमाम देश खुद के लिए खतरा महसूस कर रहे हैं. लेकिन, सबसे ज्यादा खतरा अमेरिका और उसके सबसे प्रिय मुल्क जापान को है. चीन अमेरिका की वैश्विक बादशाहत को चुनौती दे रहा है, वहीं जापान उसे अपने अस्तित्व के लिए खतरा महसूस करता है. ऐसी स्थिति में जापान अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर है. जापान और अमेरिका के बीच इसको लेकर 1960 में एक संधि हुई थी. इस संधि के तहत अमेरिका जापान पर किसी सैन्य हमले की स्थिति में उसका बचाव करेगा. लेकिन, हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच यह भरोसा थोड़ा कमजोर पड़ा है. खासकर अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद. डोनाल्ड ट्रंप इस संधि को पूरी तरह एकतरफा करार देते रहे हैं. दूसरी तरफ चीन अपनी ताकत लगातार बढ़ा रहा है. ऐसे में जापान के पास अपनी सैन्य ताकत हासिल करने के लिए अब कोई दूसरा विकल्प नहीं दिख रहा है. इसी कड़ी में वह लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है. वह अब छठी पीढ़ी के फाइटर जेट पर काम कर रहा है जो दुनिया के मौजूदा सबसे उन्नत अमेरिकी फाइटर जेट एफ-35 का बाप माना जा रहा है.

जापान के इस नए फाइटर जेट को लेकर सामरिक मामलों की एक बेहद भरोसेमंद वेबसाइट 19fortyfive.com पर एक रिपोर्ट छपी है. इस रिपोर्ट के लेखक जैक बक्बी हैं. वह एक ब्रिटिश राइटर और शोधकर्ता हैं. वह अमेरिका के न्यूयॉर्क में रहते हैं और दुनिया के सामरिक मामलों से जुड़ी खबरों का विश्लेषण करते हैं.
