जिला पंचायत सीईओ के खिलाफ लामबंद हुए सरपंच-उपसरपंच, लेनदेन कर सचिवों के तबादले का लगा आरोप, 23 मार्च को जिला पंचायत का होगा घेराव,

बीरबलभूमि समाचार सीधी। जिला पंचायत के सीईओ शैलेन्द्र सिंह सोलंकी पर भ्रष्टाचार और अपनी मर्जी चलाने के आरोप लगा हैं। जिले के सरपंचों, जनपद सदस्यों और जिला पंचायत सदस्यों का कहना है कि सीईओ सचिवों के तबादले में गड़बड़ी कर रहे हैं। जिसके चलते नाराज जनप्रतिनिधियों ने 23 मार्च को जिला पंचायत दफ्तर घेरने की चेतावनी दी है। जनपद सदस्य उर्मिला साकेत की अगुवाई में सैकड़ों जनप्रतिनिधि कलेक्ट्रेट पहुंचे और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि सीईओ पैसों के लेनदेन के आधार पर सचिवों के तबादले कर रहे हैं। आरोप है कि पहले वह तबादले का आदेश निकालते हैं और फिर उसे बदलकर नया आदेश जारी कर देते हैं। नेताओं का कहना है कि कई सचिवों को तो छह महीने के भीतर ही तीन-तीन बार अलग-अलग पंचायतों में भेज दिया गया। कुछ मामलों में तो सचिव को तबादले के बाद दोबारा उसी पुरानी जगह पर भेज दिया गया जहां वह पहले तैनात था। नियमों के मुताबिक किसी सचिव का तबादला दो साल से पहले नहीं होना चाहिए, सिवाय तब जब उसकी कोई बड़ी शिकायत न हो। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इन बार-बार के तबादलों से पंचायतों का काम बिगड़ रहा है। भाजपा नेता एवं अधिवक्ता अंबुज पांडे ने कहा कि अफसर अपने ही आदेशों को कभी गलती तो कभी कोई और बहाना बताकर बदल देते हैं जो कि सीधे तौर पर अपनी मनमानी चलाना चाहते है।
कलेक्टर के पास पहुंचा ज्ञापन,
ज्ञापन लेने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए तहसीलदार राकेश शुक्ला ने बताया कि यह शिकायत कलेक्टर तक पहुंचा दी जाएगी और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। दूसरी तरफ जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को 10 दिन का समय दिया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर मामले की जांच कर कार्रवाई नहीं हुई तो 23 मार्च को जिला पंचायत कार्यालय का बड़ा घेराव बड़ी संख्या में लोगों के साथ किया जाएगा।
चर्चा में रहा है सीईओ की शिकायत का मामला,
कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंची त्रिस्तरीय पंचायत जनप्रतिनिधियों की भीड़ ने जैसे ही सीईओ जिला पंचायत शैलेन्द्र सिंह सोलंकी के खिलाफ कार्यवाही की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे, समूचे परिसर में हड़कंप मच गया। बता दें कि जिला पंचायत कार्यालय में मनमानी की शिकायत इनकी पदस्थापना के बाद से ही मिलने लगी थी, अब तो निर्वाचित जनप्रतिनिधि खुल कर सामने आ गए हैं। ज्ञापन के अनुसार अगर 10 दिनों के भीतर संतोषजनक कार्यवाही नहीं होती है तो बड़ा आंदोलन होने से कोई रोक नहीं सकता है।
