रीवा में ‘लोल की लाई’ की बंपर डिमांड: मकर संक्रांति के लिए बढ़ाया स्टॉक; UP–बिहार वालों की पहली पसंद,

बीरबलभूमि समाचार रीवा। मकर संक्रांति मेला को लेकर रीवा में ‘लोल की लाई’ की मांग लगभग दोगुनी हो गई है। लाई खरीदने के लिए इन दिनों ग्राहकों की लंबी कतारें लग रही है। भीड़ को देखते हुए लोल इस बार अतिरिक्त स्टॉक तैयार कर रहे हैं।
पूसी तेरस पर सबसे ज्यादा बिक्री, संक्रांति पर बढ़ी मांग
स्थानीय बाजारों में हर साल पूसी तेरस से लाई की बिक्री शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार मांग पिछले सालों की तुलना में काफी अधिक देखी गई है। लाई व्यापारी लोल के अनुसार इस साल पूसी तेरस पर बिक्री 30–35% बढ़ी मकर संक्रांति के दिन करीब मांग 50–60% तक पहुंचने की संभावना है। रीवा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर खरीदी होती है। लोग मानते हैं कि जब तक लाई और रूख न खरीद लिया जाए तब तक संक्रांति का त्योहार अधूरा रहता है। इस बार मौसम अनुकूल होने से लाई की क्वॉलिटी भी बेहतर है। इसलिए लोग ज्यादा मात्रा में खरीद रहे हैं।
क्यों बढ़ रही है ‘लोल की लाई’ की डिमांड?
रीवा–विंध्य इलाके में पारंपरिक तौर पर लाई का उपयोग तेरस, संक्रांति, खरमास और शुभ मुहूर्तों के दौरान किया जाता है। लेकिन इस बार डिमांड बढ़ने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं-
1. UP-बिहार के लोग ज़्यादा ख़रीद रहे रीवा में बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग पिकनिक मनाने के लिए आते हैं। इन राज्यों में संक्रांति पर लाई खाना शुभ माना जाता है, इसलिए इनकी खरीद लगातार बढ़ रही है।
2. थोक बुकिंग भी बढ़ी लोल बताते हैं कि कई दुकानदार थोक में लाई बुक कराते हैं। इस लाई की सप्लाई रीवा के पड़ोसी जिले- सतना, शहडोल, सिंगरौली और प्रयागराज तक होती है। कारोबारियों ने बढ़ाया स्टॉक, देर रात तक चलता है मेकिंग का काम लाई के सप्लायर्स लोल का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से माहौल ऐसा है कि जितनी लाई रखो, सब बिक जाती है। दुकानदारों ने 50-70% तक अतिरिक्त स्टॉक तैयार किया है। कई जगह भुजाइयां करवाई जा रही हैं। देर रात तक लाई तोलने-पैकिंग का काम लगातार जारी है। क्वालिटी को लेकर भी इस बार विशेष ध्यान रखा जा रहा है। ग्परंपरागत लोल की लाई इस बार ग्राहकों के लिए नई वैराइटी भी आई है। जिसका अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।
• गुड़ वाली लाई
• तिल-लाई मिक्स
• फुल्ली लाई
• हल्की नमकीन टच वाली लाई
• बच्चों के लिए शुगर-फ्री लाई
खरीददारों की राय
ग्राहक बताते हैं कि रीवा की लाई ताज़ी, मोटी और कुरकुरी होती है, इसलिए UP–बिहार के लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं। कई छात्र और नौकरीपेशा लोग घर भेजने के लिए 2-5 किलो तक लाई खरीदते हैं।
संक्रांति तक रहेगा पीक सीजन
मकर संक्रांति (14 जनवरी) तक लाई की खपत सबसे अधिक रहने की संभावना है। संक्रांति के बाद शादी–विवाह और शुभ मुहूर्तों के कारण इसकी मांग बनी रहेगी।
