सिर्फ तीन दिनों में बदली तस्वीरः ग्राम करही के शासकीय विद्यालय का कायाकल्प बना मिसाल,

स्वप्रेरित जनसहभागिता का कमालः जनप्रतिनिधियों, शाला विकास समिति और ग्रामीणों ने मिलकर संवारा विद्यालय,
बीरबलभूमि समाचार सीधी। “जहां चाह, वहां राह”- इस कहावत को चरितार्थ करते हुए सीधी जिले के ग्राम पंचायत माटा अंतर्गत ग्राम करही के शासकीय प्राथमिक शाला करही ने महज तीन दिनों में अद्भुत परिवर्तन की मिसाल पेश की है। जनप्रतिनिधियों, शाला विकास समिति और ग्रामीणों की स्वप्रेरित सहभागिता से विद्यालय का ऐसा कायाकल्प हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र का ध्यान आकर्षित किया है। कलेक्टर श्री विकास मिश्रा के निरीक्षण के बाद शुरू हुए इस अभियान में समुदाय ने एकजुट होकर विद्यालय की तस्वीर बदलने का संकल्प लिया। देखते ही देखते तीन दिनों के भीतर विद्यालय में रंग-रोगन, साफ-सफाई और फर्नीचर की सुदृढ़ व्यवस्था कर दी गई। साथ ही बच्चों के लिए स्कूल यूनिफॉर्म, स्कूल बैग और कॉपियों की व्यवस्था कर शिक्षा के प्रति नया उत्साह पैदा किया गया। इस परिवर्तन में अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। उन्होंने न केवल अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने का संकल्प लिया, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का भरोसा भी जताया। विद्यालय के सतत विकास में सहयोग देने का संकल्प भी लिया गया। ग्राम पंचायत माटा के सरपंच श्री इंद्रदेव विश्वकर्मा ने कहा कि यह पहल केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पंचायत के अन्य शासकीय विद्यालयों में भी इसी मॉडल को लागू किया जाएगा। शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री बृजेन्द्र सिंह गोंड ने कहा कि यह हमारा अपना विद्यालय है। यहां हमारे बच्चे पढ़ते हैं, इसलिए इसके संचालन और विकास की जिम्मेदारी भी हमारी है, जिसे हम पूरी निष्ठा से निभाएंगे। डीपीसी जिला शिक्षा केंद्र श्री विनय मिश्रा ने बताया कि भ्रमण में पाई गई कमियों के आधार पर संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और शाला प्रबंधन समिति द्वारा स्वप्रेरणा से किया गया यह बदलाव अनुकरणीय है। साथ ही जिले के अन्य विद्यालयों में भी शासन के निर्देशानुसार व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। तीन दिनों में हुआ यह कायाकल्प इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब समाज एकजुट होकर शिक्षा को प्राथमिकता देता है, तो बदलाव असंभव नहीं रहता। ग्राम करही का यह प्रयास पूरे जिले के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया है।
