एमस्ट्राइप्स और एआई से वन्य जीवों की होगी सटीक पहचान,
हाईटेक कैमरे से जंगलों पर रहेगी पैनी नजर,

बीरबलभूमि समाचार सीधी। जिले में वन्य प्राणियों की सटीक गणना और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए हाईटेक कैमरा ट्रैपिंग तकनीकि का उपयोग शुरू किया जा रहा है। इसी तारतम्य में वन मंडल सीधी के बरमबाबा बीट के जंगलों में हाईटेक कैमरे लगाए जा रहे हैं। ये कैमरे बाघ, तेंदुआ समेत अन्य वन्य जीवों की मौजूदगी और उनके मूवमेंट को रिकार्ड करेंगे। कैमरा ट्रैपिंग आधारित तकनीक से वन्य जीवों पर जहां पैनी नजर रखी जाएगी वहीं उनकी गतिविधियों और मौजूदगी की जानकारी भी हांसिल की जाएगी। दरअसल कैमरा टै्रपिंग एक वैज्ञानिक तकनीक है जो मोशन सेंसर सिस्टम पर आधारित होती है। यदि हाईटेक कैमरे के सामने से कोई जंगली जानवर गुजरता है तो उसकी तस्वीर कैप्चर कर ली जाती है। वन विभाग के जंगल को छोटे-छोटे ग्रिड में विभाजित कर प्रत्येक एक-दो वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में कैमरों की जोड़ी लगाई जा रही है। ये हाईटेक कैमरे करीब 30 से 45 दिन तक सक्रिय रहेंगे। यह तकनीक बाघों की पहचान के लिए बेहद कारगर मानी जाती है। बाघों के शरीर पर बनी धारियां इंसानों के फिंगर प्रिंट की तरह अद्वितीय होती हैं। इन तस्वीरों का विष्लेषण कर बाघों की सटीक संख्या का आंकलन किया जाता है। अब एमस्ट्राइप्स ऐप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से डेटा प्रोसेसिंग को और अधिक तेज और विश्वसनीय बनाया जा रहा है। एआई की मदद से डेटा प्रोसेसिंग को ज्यादा विश्वसनीय बनाने के लिए विशेष हाइटेक कैमरों की जंगल में अलग-अलग स्थानों में लगाया जा रहा है।
कैमरा का किया जा रहा परीक्षण,
कैमरों को लगाने के बाद इनका परीक्षण भी किया जा रहा है कि इनकी रिकार्डिंग क्षमता और स्पष्ट तस्वीर कितने मीटर दूर तक से आ सकती है। वन टीम द्वारा बरमबाबा बीट के जंगलों से इसकी शुरुआत की गई है। आने वाले समय में सीधी जिले के अन्य जंगलों में भी उक्त हाइटेक कैमरों को लगाया जाएगा। हाइटेक कैमरों के लगने से संंबंधित जंगलों के बीट अमले को भी काफी राहत मिलेगी। बीट में वन्य जीवों की गतिविधियों के साथ ही अन्य अवांछनीय गतिविधियों की जानकारी भी अब पुख्ता रूप से सामने आएगी। जरूरत इस बात की है कि लगाए जा रहे हाइटेक कैमरों की मानीटरिंग का कार्य नियमित रूप से किया जाए। मानीटरिंग के दौरान बड़े अधिकारियों की उपस्थिति रहनी चाहिए। जिससे जंगलों में वन्य जीवों के साथ ही वहां होने वाली अन्य गतिविधियों की जानकारी भी समय-समय पर मिलती है। यदि मानीटरिंग की जिम्मेदारी छोटे कर्मचारियों तक ही सीमित रही तो इसका विशेष लाभ वन मंडल को नहीं मिलेगा। बाद में कैमरों के बिगडऩे का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। जिससे रिकार्डेड जानकारी सामने न आ सके।
इनका कहना है।
वन मंडल सीधी के बरमबाबा बीट के जंगल में हाईटेक कैमरे लगाए जा रहे हैं। 5 दिनों से इनको लगाने का कार्य किया जा रहा है। इस अभियान में संजय टाईगर रिजर्व की टीम, क्षेत्रीय वन समिति के अध्यक्ष और अन्य सहयोगी शामिल हैं। सभी वन विभाग के साथ मिलकर इस महत्वपूर्ण कार्य को सफल बनाने में जुटे हुए हैं।
पंकज मिश्रा, वनपाल
बरमबाबा बीट सीधी।
