ओबीसी आरक्षण मामले में सरकार की टालमटोल निंदनीय: कमलेश्वर,
बीरबलभूमि समाचार सीधी। प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य कमलेश्वर पटेल ने कहा कि मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में आज फिर सुनवाई टलना अत्यंत चिंताजनक है। यह सिर्फ एक तारीख का टलना नहीं, बल्कि सरकार की नीयत और प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अगर भाजपा सरकार की नीयत साफ होती, तो कमलनाथ की कांग्रेस सरकार द्वारा पारित किए गए 27 प्रतिशत आरक्षण को 7 वर्षों तक निराधार बहाने बनाकर रोका नहीं जाता। इससे स्पष्ट है कि सरकार का रवैया ओबीसी हितों के प्रति विरोधात्मक और उपेक्षापूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार सरकार ने अपने ही नियुक्त विशेष अधिवक्ताओं को अंतिम समय में बदल दियाए वह साफ दर्शाता है कि सरकार इस मामले को मजबूती से लडऩे के बजाय जानबूझकर कमजोर कर रही है। जो अधिवक्ता इस पूरे प्रकरण की बारीकियों को समझते थेए उन्हें हटाना सीधे तौर पर ओबीसी समाज के हितों के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार वास्तव में ओबीसी वर्ग के साथ खड़ी हैए तो 27 प्रतिशत आरक्षण को बचाने के लिए पूरी ताकत से कानूनी लड़ाई क्यों नहीं लड़ी जा रही है। बार बार वकील बदलना और सुनवाई टलवाना यह संकेत देता है कि सरकार इस मुद्दे को लंबित रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं कई बार यह कह चुके हैं कि पूर्व सरकार द्वारा बनाया गया कानून कमजोर है। जब सरकार खुद ही अपने कानून को कमजोर बताएगी, तो अदालत में उसका प्रभावी बचाव कैसे संभव होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह वही 27 प्रतिशत आरक्षण है, जिसे पूर्व कांग्रेस सरकार ने ओबीसी वर्ग को उनका अधिकार दिलाने के लिए लागू किया था। आज की सरकार उस अधिकार को सुरक्षित रखने के बजाय उसे खत्म होने देने की दिशा में काम करती नजर आ रही है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि ओबीसी समाज के नाम पर सिर्फ राजनीतिक चेहरे आगे किए गए, लेकिन वास्तविक अधिकार देने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। चार ओबीसी मुख्यमंत्रियों का दावा करने वाली भाजपा यह स्पष्ट करे कि उनमें से किसी एक ने भी ओबीसी आरक्षण को मजबूत करने के लिए क्या ठोस पहल की। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि सरकार अदालत में जानबूझकर कमजोर पक्ष रख रही है, जिससे 27 प्रतिशत आरक्षण निरस्त होने की आशंका बढ़ रही है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। अंत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ओबीसी वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस अन्याय के खिलाफ हर मंच पर मजबूती से आवाज उठाती रहेगी।
