‘चिरैया’ कार्यक्रम रामपुर नैकिन में किशोर स्वास्थ्य और एचपीवी पर फोकस, तीन स्कूलों में चला जागरूकता अभियान,

बीरबलभूमि समाचार सीधी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बबिता खरे के निर्देशन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुर नैकिन द्वारा ‘चिरैया’ कार्यक्रम के तहत किशोर स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। यह अभियान कन्या हायर सेकंडरी स्कूल चुरहट, हायर सेकंडरी स्कूल ममदर एवं सीएम राइज स्कूल रामपुर नैकिन में आयोजित किया गया, जहां छात्राओं को एचपीवी टीकाकरण, एनीमिया नियंत्रण, प्रजनन स्वास्थ्य एवं स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। अभियान के तहत नीतू गुप्ता, नर्सिंग ऑफिसर सीएचसी चुरहट एवं आकांक्षा बघेल, नर्सिंग ऑफिसर पीएचसी दढ़िया द्वारा ‘चिरैया’ प्रचार वाहन के माध्यम से निर्धारित स्कूलों में पहुंचकर संवाद सत्र आयोजित किए गए। इस दौरान छात्राओं के साथ खुलकर चर्चा करते हुए उन्हें किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तनों के प्रति जागरूक किया गया। नर्सिंग ऑफिसरों ने बताया कि किशोरावस्था जीवन का महत्वपूर्ण चरण होता है, जिसमें सही पोषण और जागरूकता बेहद आवश्यक है। एनीमिया से बचाव के लिए साप्ताहिक आयरन-फोलिक एसिड की नीली गोली का सेवन, हरी पत्तेदार सब्जियों का उपयोग एवं संतुलित आहार अपनाने की सलाह दी गई। साथ ही मासिक धर्म स्वच्छता एवं प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों पर चर्चा कर उनके समाधान भी बताए गए। कार्यक्रम के दौरान 14 से 15 वर्ष 3 माह तक की बालिकाओं को भविष्य में सर्वाइकल कैंसर से बचाव हेतु निःशुल्क एचपीवी टीकाकरण के लिए प्रेरित किया गया। ‘एच का टीका, सुरक्षा का संकल्प-सर्वाइकल कैंसर से बेटियों का जीवन बचाने का नया विकल्प’ संदेश के माध्यम से अभिभावकों एवं शिक्षकों को भी जागरूक किया गया। मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी रामपुर नैकिन डॉ. प्रेरणा पाठक ने बताया कि ‘चिरैया’ कार्यक्रम का उद्देश्य किशोर-किशोरियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना है, ताकि वे स्वस्थ रहकर अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें। उन्होंने अपील की कि 31 मई 2026 से पूर्व सभी पात्र बालिकाओं का यू-विन पोर्टल पर पंजीकरण कराकर एचपीवी टीकाकरण सुनिश्चित कराया जाए। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन एवं छात्राओं ने स्वास्थ्य विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि किशोर स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर इस प्रकार का खुला संवाद अत्यंत आवश्यक है।
