आजीविका मिशन की पहल से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर, बैकयार्ड कुक्कुट योजना से मिल रहा आत्मनिर्भरता का सहारा,

बीरबलभूमि समाचार सीधी। मध्यप्रदेश डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, विकासखंड सीधी द्वारा संचालित एकीकृत कृषि क्लस्टर के माध्यम से ग्रामीण एवं भूमिहीन समूह की महिलाओं को आजीविका के नए अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। मिशन द्वारा अभिसरण के जरिए महिलाओं को शासन की बैकयार्ड कुक्कुट इकाई वितरण योजना से जोड़ा जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। योजना का उद्देश्य कम लागत में उन्नत तकनीक के माध्यम से कुक्कुट पालन को बढ़ावा देना, अंडा एवं मांस उत्पादन में वृद्धि करना तथा हितग्राहियों के परिवारों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही महिलाओं को आर्थिक तंगी से उबारकर उन्हें आत्मनिर्भर एवं सशक्त उद्यमी के रूप में स्थापित करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है। इसी क्रम में एकीकृत कृषि क्लस्टर के अंतर्गत ग्राम बढ़ौरा एवं कुबरी में समूह से जुड़ी भूमिहीन, हरिजन एवं आदिवासी महिलाओं को 680 चूजों का वितरण किया गया। इस पहल से महिलाओं में उत्साह का माहौल है और वे इसे आय के स्थायी स्रोत के रूप में अपना रही हैं। उल्लेखनीय है कि बैकयार्ड कुक्कुट इकाई वितरण योजना की कुल लागत 2225 रुपये निर्धारित है, जिसमें 1669 रुपये अनुदान राशि तथा 556 रुपये हितग्राही अंशदान के रूप में शामिल है। योजना के तहत प्रत्येक हितग्राही को 28 दिवसीय उन्नत नस्ल के 40 चूजे प्रदान किए जाते हैं। यह पहल न केवल महिलाओं की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है।
